Saturday, April 18, 2009

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ना इश्क मालूम है मुझे
ना जूनून का ही है पता
ना इबादत का इलम है
ना खुदा से ही हूँ मिला

फिर क्यों हर चेहरे में तू नजर आता है
क्यों धड़कने बढ़ जाती है देख कर तुझे
क्यों सांसो में महक है तेरी
क्यों हर आहट में है तेरा साया

अनजाने में खीचा में ओर तेरी
ना चाह कर भी फिसलती रही डोर मेरी
अब हर पल मैं तुझ से बातें किया करता हूँ
फिर से वोही पागलपन,वोही दीवानगी मेरी

कहते है सब दिल कहाँ दीखता है आँखों से
क्या तुझे भी चेहरों से ही, प्यार करना है आता?
क्या तेरी नज़रे देख पायेगी मेरी चाहत को
या की तू भी कहेगा हम दोस्त तो है कम-स-कम

शायद..शायद तुने सोचा ना हो मेरे बारे में कभी
पर सहसा एहसास तो कभी कोई आया होगा
ना नम हूई आँखे तेरी, तो ना सही
पर एक कतरा चुबन का , तो कभी तुने पाया होगा

क्या तुझे भी है प्यार, मेरी ही तरह टूट कर?
या की तू अभी और अज्माना चाहता है
पागल,दीवाना और ना जाने क्या क्या कह गए लोग मुझे
मेरा दिल तो तेरा आशिक कहलाना चाहता है

लाफ्झो के तराने ना शोंक था मेरा
पर अमोमन ही उठे कलम को ना मैं रूकना चाहता हूँ
पाना नहीं खोना था मुझे तो इस जग में
पर मैं अब खुद को खो कर तुझको पाना चाहता हूँ

मालूम है मुझको
ना एहसास ही है पूरे मेरे
ना डर ही है अधूरा मेरा
ना तो होश में ही हूँ आज मैं अपने
ना की बेहोश ही हो पा रहा हूँ
ना गीतों का था शोंक मुझे
जाने क्यों मैं आज फिर गुनगुना रहा हूँ...गुनगुना रहा हूँ

ना इश्क मालूम है मुझे
ना जूनून का ही है पता
ना इबादत का इलम है
ना खुदा से ही हूँ मिला
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Gagan
My heart is still beating I thought I turned it off some time back…